चीन में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच अलर्ट मोड में भारत, स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज बुलाई समीक्षा बैठक
चीन में एक बार फिर कोरोना विस्फोट हो गया है। आलम यह है कि वहां के अधिकतर हॉस्पिटल्स भर गए हैं और लोगों को इलाज के लिए बेड नहीं मिल रहा है। साथ ही कोरोना संक्रमण की वजह से मरने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। जिसकी वजह से श्मशान घाटों पर लाशों का अंबार लग गया है। कई हेल्थ एक्सपर्ट्स ने दावा किया है आगामी तीन महीने में चीन की 60 प्रतिशत आबादी कोरोना से संक्रमित होगी। वहीं, इस दौरान मौतों के आंकड़ों में भी बढ़ोतरी होगी।
अलर्ट मोड में भारत, आज बुलाई समीक्षा बैठक
चीन में हुए कोरोना विस्फोट की वजह से भारत सहित अन्य देशों की टेंशन भी बढ़ गई है। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना समीक्षा बैठक बुलाई है। इस बात की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया की तरफ से दी गई है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कोरोना वायरस संक्रमण के ट्रैकिंग को लेकर कई निर्देश जारी किए जा सकते हैं। वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से क्रिसमस और न्यू ईयर को लेकर गाइडलाइंस भी जारी की जा सकती है। हालांकि, इस बात की पुष्टि मंत्रालय की तरफ से नहीं की गई है। ये सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं।
जापान, अमेरिका सहित इन देशों में बढ़ रहे हैं केस
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण के मामले चीन के अलावा जापान, अमेरिका, कोरिया, ब्राजील में भी बढ़ने लगे हैं। यही वजह है कि भारत अलर्ट मोड में आ चुका है। इसी को देखते हुए मंगवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों को अलर्ट करते हुए गुजारिश की है कि जहां तक संभव हो हर दिन पता चलने वाले पॉजिटिव केस के सभी केस की जीनोम सीक्वेंसिंग करवाई जाए। सचिव ने अपने आदेश में कहा INSACOG जीनोम सीक्वेंसिंग लैब (IGSLs) को भेजे जाएं।
भारत में फिलहाल कम है कोरोना का खतरा
फिलहाल भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा कम है। क्योंकि भारत में वैक्सीनेशन 3 राउंड में किया जा चुका है। हालांकि, सुरक्षा बरतनी जरूरी है। यही वजह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से बुधवार यानि कि आज समीक्षा बैठक बुलाई गई है। आपको बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से भारत सहित दुनिया का सबसे बुरा दूसरी लहर के दौरान हुआ था। भारत में दूसरी लहर के दौरान अधिकतर मरीजों में ऑक्सीजन की कमी देखने को मिल रही थी। साथ ही दूसरी लहर में इतनी ज्यादा संख्या में मरीज मिल रहे थे कि हॉस्पिटल्स में लोगों को बेड नहीं मिल पा रहे थे।