अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, जयपुर। राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए मानसून 2022 अब तक आफत भरा रहा है। दोनों प्रदेशों की सीमा से लगते जिलों में बाढ़ आई हुई है। राजस्थान में कोटा, धौलपुर, बांरा बूंदी, झालावाड़ और उदयपुर में बरसाती पानी सबसे ज्यादा आफत बना हुआ है।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही चंबल
राजस्थान और एमपी के बीच बहने वाली चंबल नदी में भी इस साल रिकॉर्ड तोड़ पानी आया है। साल 1996 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि चंबल नदी का जलस्तर 146.34 मीटर को छू गया, जो खतरे की निशानी है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 145.54 मीटर का था, जो गुरुवार दोपहर साढ़े 12 बजे टूट गया। फिलहाल चंबल नदी खतरे के निशान (130.79 मीटर) से 15 मीटर ऊपर बह रही है।
नदी में डूबने से युवक की मौत
कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने कारण धौलपुर जिले के चंबल किनारे बसे 120 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे का पुराना पुल पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। धौलपुर जिले में चंबल के साथ-साथ पार्वती नदी का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। गुरुवार दोपहर मनियां थाना क्षेत्र के गड़ाइच गांव में पार्वती नदी में डूबने से एक युवक की डूबने से मौत हो गई। थाना प्रभारी बीधाराम अंबेश के अनुसार युवक की शिनाख्त चौधरी पुरा गांव निवासी अमित (20) पुत्र महेश परमार के रूप में हुई है।
अंधेरे में डूबे 80 गांव
धौलपुर जिले में चंबल किनारे के गांवों में हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 80 गांव दो दिन से अंधेरे में डूबे हैं। लोग बाढ़ की वजह से घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। बात अगर धौलपुर शहर की करें तो चंबल का पानी मोक्षधाम को जलमग्न करते हुए पुरानी सागरपाड़ा चौकी तक पहुंच गया है। राजाखेड़ा क्षेत्र में सेना और एसडीआरएफ की टीम की ओर से राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया।
अधिकारियों ने लिया जायजा:
बुधवार को राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा, धौलपुर जिला कलक्टर अनिल कुमार अग्रवाल, पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर रेंज गौरव श्रीवास्तव औरधौलपुर पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह ने राजाखेड़ा क्षेत्र के महदपुरा इलाके में बाढ़ का जायजा लिया।