Putrada Ekadashi 2023: पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। शास्त्रीय मान्यता है किपुत्रदा एकादशी का व्रत करने से नि:संतान दंपतियों को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। इससे संतान को आयु और आरोग्यता प्राप्त होती है। जिन लोगों की संतानें पैदा होने के बाद अधिक समय तक जीवित नहीं रहती या जिन्हें बार-बार गर्भपात होता है, उन्हें भी पुत्रदा एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। जिनकी कुंडली में किसी ग्रह दोष के कारण संतान सुख नहीं मिल रहा हो वे भी यह व्रत जरूर करें। यह व्रत उन दंपतियों को भी करना चाहिए जिनकी संतानें गलत रास्ते पर चली गई हैं और उनका कहना नहीं मानती। इस बार पुत्रदा एकादशी 2 जनवरी 2023 सोमवार को आ रही है। पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का विधिपूर्वक पूजन कर उनसे उत्तम संतान की प्रार्थना की जाती है।
पुत्रदा एकादशी व्रत की विधि
पुत्रदा एकादशी के दिन अपने घर के पूजा स्थान में एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति का चित्र रखकर एकादशी व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजन करें। भगवान को पीले पुष्प अर्पित करें। नैवेद्य लगाएं। गाय के शुद्ध घी और गोछाछ का भोग भी लगाएं। इसके बाद पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। पूरे दिन निराहार रहें। क्षमता न हो तो फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। द्वादशी के दिन प्रात: व्रत का पारण करें। ब्राह्मण दंपती को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा दें और फिर स्वयं भोजन करें।
पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा
किसी समय भद्रावती नगरी में राजा सुकेतु राज करता था। उसकी पत्नी का नाम शैव्या था। उनकी कोई संतान नहीं थी, इससे राजा-रानी बहुत दुखी रहते थे। एक दिन राजा-रानी ने अपना सारा राज्य मंत्री को सौंपा और स्वयं वन मेंे चले गए। एक दिन वन में उन्हें वेद पाठ के स्वर सुनाई दिए। वे स्वर की दिशा में बढ़ते चले गए। उन्होंने देखा किअनेक ऋषि नदी के किनारे यज्ञ कर रहे थे। राजा-रानी ने ऋषियों को प्रणाम किया। ऋषियों ने दंपती के मन की पीड़ा जान ली और उन्हें पौष माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली पुत्रदा एकादशी का व्रत करने का आदेश दिया। राज दंपती ने विधि विधान से व्रत किया और उन्हें व्रत के प्रभाव से एक पुत्री और एक पुत्र संतान की प्राप्ति हुई।
एकादशी तिथि कब से कब तक
एकादशी तिथि प्रारंभ : 1 जनवरी को सायं 7.14 से एकादशी तिथि पूर्ण : 2 जनवरी को रात्रि 8.24 तक व्रत का पारणा : 3 जनवरी प्रात: 7.08 से 9.17