अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, धर्म-दर्शन। ना दिखे चांद तो कैसे खोलें करवा चौथ का उपवास? : पिछले कई दिनों से देश के कई हिस्सों में भारी बारिश ने आफत पैदा की हुई है। भारतीय मौसम विभाग ने आज भी देश के कई राज्यों में बारिश की आशंका व्यक्त कर रखी है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि बारिश या बादल के कारण अगर चांद नजर ना आए तो फिर उपवास रखने वाली महिलाएं अपना व्रत कब और कैसे खोलेंगी? तो इसके लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।
अगर किसी कारणवश आपको आज चंद्र दर्शन नहीं हो रहे हैं तो आप सांकेतिक रूप से चंद्रमा को मानकर अपना व्रत खोल सकती हैं। पहली कंडीशन में आप उस दिशा में खड़ी हो जाइए, जिस दिशा में चंद्रमा उदय होता है,फिर आंख बंदकर चंद्रमा का ध्यान कीजिए और अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए प्रार्थना कीजिए।दूसरी दशा में आप शिव भगवान की तस्वीर में चांद को देखकर पूजा कर लीजिए और उन्हें जल अर्पण कर लीजिए। अगर संभव हो सके तो शिवमंदिर चली जाएं और वहां चंद्रदेव की पूजा और शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद व्रत खोलें।
तीसरी दशा
ये हो सकती है कि आप नेटवर्क का इस्तेमाल करें, आजकल जमाना सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी का है। आप सीधे अपने रिश्तेदारों या दोस्तों को कॉल कीजिए और उनसे पूछिए कि क्या उनके यहां चंद्रदर्शन हो रहे हैं, अगर जवाब हां में मिले तो आप भी वीडियो कॉल से चांद को देखकर अर्ध्य देकर अपना व्रत खोल सकती हैं।
आपको बता दें कि चंद्रमा को शीतलता का प्रतीक और औषधियों का स्वामी कहा जाता है, माना जाता है कि चंद्रमा की पूजा करने वाली पत्नी के पति को यश प्राप्ति होती है। उसे लंबी उम्र के साथ तरक्की और वैभव सब नसीब होता है।
वीरवती की कथा
वैसे करवा चौथ पर चांद को पूजने का एक पौराणिक कथा है, जिसमें वीरवती नाम की एक महिला थी जो कि सात भाईयों की चहेती बहन थी। उसकी शादी एक बहुत ही बढ़िया, वीर और सच्चे इंसान से हुई थी। शादी के बाद जब उसने पहला करवा चौथ रखा तो उसकी हालत बिना पानी के थोड़ी खराब हो गई। अपनी लाडली बहन की ये दशा उसके छोटे भाई से देखी नहीं गई, उसने पेड़ की एक शाखा पर छलनी और उसके पीछे दीपक रख दिया और बोला कि चांद निकल गया है।
वीरवती ने अपने भाई की बात मान ली और उस चांद को देखकर अपना व्रत खोल दिया लेकिन ऐसा करने की वजह से उसके पति की मृत्यु हो गई। उसके तो पैर के नीचे की जमीन ही खिसक गई। लेकिन तभी उसकी भाभी ने उसकी भूल बताई। तब वीरवती अपने पति की लाश के पास दीपक जलाकर करवा माता की पूजा करने लग गई। एक साल बाद जब फिर से करवा चौथ आया तो उसने वापस निर्जला व्रत रखा और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की, इस बार उसने कोई गलती नहीं की, तब करवा माता काफी प्रसन्न हुई और उसके सामने प्रकट हुईं और उससे वरदान मांगने को कहा, तब वीरवती ने मां से कहा कि वो उसके पति को जिंदा कर दें। तब करवा मां ने उसके पति को जिंदा कर दिया। तभी से ही करवा चौथ पर चंद्रदेव की पूजा करने का विधान बन गया।