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Chanakya Neeti: सफलता पाने के लिये चाणक्य के ये राज जानना बहुत जरूरी

  • मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत् ।
  • मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्य चापि नियोजयेत् ।।

अर्थात्- मन में सोचे हुए कार्य को कभी मुंह से बाहर नहीं निकालना चाहिए। मंत्र के समान गुप्त रखते हुए उसकी रक्षा करनी चाहिए और गुप्त रखकर ही उस काम को करना भी चाहिए।

उपरोक्त श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य कार्य सिद्धि का रहस्य बता रहे हैं। उनका कहना है कि कई कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें करने का विचार यदि आपके मन में है तो उसे मन में ही रहने दें। जिस प्रकार गुरु प्रदत्त मंत्र किसी के सामने बोला नहीं जाता, सार्वजनिक नहीं किया जाता, ठीक उसी प्रकार अपने मन में सोचे हुए कार्य को भी मंत्र के समान ही गोपनीय रखना चाहिए और गुप्त रूप से ही उसे पूरा भी कर लेना चाहिए। कहने का आशय यह है कि जब कार्य चल ही रहा है तभी से उसका ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए क्योंकि यदि काम पूरा नहीं हो पाया और आपने पहले से उसका प्रचार-प्रसार कर दिया तो हो सकता है काम अधूरा रह जाने पर या असफल हो जाने पर लोग आपकी हंसी उड़ाए।

कई लोग तो मन ही मन द्वेष भावना रखते हैं। ऐसे में यदि उन्हें आपके कार्य की सिद्धि का पता चल गया तो वे काम बिगाड़ सकते हैं या किसी अन्य से आपका काम बिगड़वा भी सकते हैं। यह शास्त्रीय नियम भी है कि जिस काम को आप लगन से और गोपनीय ढंग से करते हैं उसमें सफलता मिलना आसान हो जाता है।

पहले से लोगों को बता देने से कार्य की सिद्धि में बाधा आ सकती है और फिर काम पूरा हो जाने पर लोगों को पता चल ही जाता है इसलिए उत्तम यही होता है कि अपने काम गोपनीय ढंग से पूरे किए जाएं।

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