छत्तीसगढ़ विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित हो गया है। हाईकोर्ट के एक फैसले से छत्तीसगढ़ में आरक्षण शून्य हो चुका था। इस फैसले का प्रदेश भर के आदिवासियों को इंतजार था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। विधानसभा के विशेष सत्र में लम्बी बहस के बाद इन दो आरक्षण संशोधन विधेयकों को पारित किया गया।
अनुसूचित जनजाति वर्ग को मिलेगा 32 प्रतिशत आरक्षण
विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद राज्यपाल के हस्ताक्षर होते ही यह विधेयक अधिनियम बन जाएंगे। इस विधेयक के अनुसार राज्य सरकार अनुसूचित जनजाति (ST) को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति वर्ग (SC) को 13 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत और आर्थिकर रूप से कमजोर (EWS) को चार प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव दिया था।
आज ही विधेयक में होंगे हस्ताक्षर
विधानसभा में संशोधन विधेयक पास होने के बाद राज्य सरकार के मंत्रियों का समूह राज्यपाल अनुसुईया उइके से मुलाकात करने पहुंचा। राज्यपाल के विधेयक पर हस्ताक्षर करने के बाद आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा, जिसके बाद प्रदेश के स्कूल कॉलेज और सभी संस्थानों में आरक्षण रोस्टर जारी किया जा सकेगा। दरअसल छत्तीसगढ़ में 19 सितंबर तक 68% आरक्षण लागू था। जिसमें अनुसूचित जाति को 12% अनुसूचित जाति को 32% और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14% आरक्षण दिया गया था। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10% आरक्षण की व्यवस्था थी। 19 सितंबर को बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में आरक्षण शून्य हो गया था।
विपक्ष ने रखा संसोधन का प्रस्ताव,
सरकार ने किया अस्वीकार नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि सदन में क्वांटिफ़ायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट ही पेश नहीं कि गई। सदन में ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई। जबकि इसके अनुसार ही आरक्षण का आधार बनाया गया है। पहले सदन में डाटा प्रस्तुत होना चाहिए था। फिर इसे कानून बनाया जाता। लेकिन सरकार को इसकी जल्दी थी। पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि इस बात की क्या गारंटी है कि कोई कुणाल शुक्ला कल इस विधेयक को कोर्ट में चुनौती नहीं देगा। सदन में विपक्ष की ओर से एससी वर्ग को 16 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को दस प्रतिशत आरक्षण देने का संशोधन पेश किया गया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया।
क्वांटिफायबल डाटा को बनाएगा गया आधार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनगणना में एससी वर्ग की आबादी 16 प्रतिशत आएगी, तो उनके आरक्षण में संशोधन किया जाएगा। यह आरक्षण क्वांटिफायबल डाटा आयोग के आधार पर दिया जा रहा है। यह छत्तीसगढ़ के लिए मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष नरायन चंदेल, पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह जनता कांग्रेस और बसपा के सभी विधायकों से अपील की है, उन्होंने कहा कि सभी केंद्र सरकार के पास जाकर आरक्षण संशोधन विधेयक को नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए मांग करते है, ताकि प्रदेश के लोगों को इसका लाभ मिल सके।
सीएम ने पेश किया शासकीय संकल्प,
विपक्ष ने किया वॉकआउट मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरक्षण संसोधन विधेयक पारित होने के बाद एक शासकीय संकल्प पेश किया। जिसमें छत्तीसगढ़ के दोनों आरक्षण कानूनों को संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया गया,क्योंकि संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। भाजपा ने संकल्प का विरोध किया। भाजपा विधायकों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक शासकीय संकल्प है जिससे सरकार एक साल तक यह कह सके कि हमनें तो केंद्र को संकल्प भेजा है। भारी हंगामे के बीच भाजपा ने वॉकआउट कर दिया।