अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, बैंकॉक | बैंकॉक में आयोजित बिम्सटेक शिखर सम्मेलन इस बार कुछ अलग था—आंकड़ों और एजेंडों से हटकर, यह भारत के डिजिटल आत्मविश्वास की झलक बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से जब यह कहा कि यूपीआई (UPI) को बिम्सटेक देशों के बीच साझा पेमेंट सिस्टम बनाया जाए, तो सिर्फ एक वित्तीय प्रस्ताव नहीं रखा गया, बल्कि भविष्य की एक संभावित डिजिटल यूनियन की नींव रख दी। भारत ने सम्मेलन के दौरान जो दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, उसमें व्यापारिक जुड़ाव से कहीं अधिक एक आर्थिक आत्मनिर्भरता का संदेश था। पीएम मोदी ने न सिर्फ भारत की यूपीआई सफलता का ज़िक्र किया, बल्कि यह भी कहा कि “हम सिर्फ लेन-देन का प्लेटफॉर्म साझा नहीं कर रहे, बल्कि आपसी विश्वास की एक नई डिजिटल भाषा गढ़ रहे हैं।”
सम्मेलन में जब भूटान और नेपाल के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे पहले ही भारत के यूपीआई नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, तो अन्य सदस्य देशों ने भी रुचि दिखाई। पीएम मोदी ने ज़ोर दिया कि UPI के ज़रिए सीमाएं मिट सकती हैं, और व्यापार से लेकर पर्यटन तक—हर मोर्चे पर सहयोग को गति मिल सकती है।
इसके साथ ही भारत ने साइबर सुरक्षा, स्टार्टअप सहयोग, फिनटेक इनोवेशन, और डिजिटल स्किल ट्रेनिंग जैसे कई क्षेत्रों में भी संयुक्त योजनाओं की बात की। मोदी सरकार की योजना यह है कि BIMSTEC क्षेत्र, जो अब तक सिर्फ भौगोलिक जुड़ाव से पहचाना जाता था, अब डिजिटल एकजुटता का मॉडल बने।
यूपीआई, जो भारत में एक आम मोबाइल ऐप की तरह दिखता है, अब एक डिप्लोमैटिक टूल बनता जा रहा है—यह बात सम्मेलन के समापन पर साफ हो गई।