Holi 2023: होलिका दहन प्रदोष व्यापिनी फाल्गुन पूर्णिमा में किया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 6 मार्च को शाम 4:17 से प्रारंभ होकर 7 मार्च की शाम को 6:09 बजे तक रहेगी। इस कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में 6 और 7 मार्च को होलिका दहन किया जा सकता है। हालांकि होलिका दहन कब करना है, यह राज्य, स्थान विशेष के स्थानीय लोंगों की स्वेच्छा पर रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पुरूषोत्तम तिवारी द्वारा गृह-नक्षत्रों की गणना के आधार पर
भारत में जहां सूर्यास्त 6 मार्च को 6:09 बजे शाम को होगा वहां पर होलिका दहन 6 मार्च को और जिन प्रदेशों में सूर्यास्त शाम 6:09 से पूर्व होगा वहां पर दहन 7 मार्च को किया जाएगा। बता दें कि देश में सरकार द्वारा 7 और 8 मार्च को होलिका दहन व धुलेंडी का अवकाश घोषित किया है।
होलिका दहन के मुहूर्त को लेकर किस राज्य में क्या स्थिति रहेगी
पंडित और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार राजस्थान सहित कई राज्यों में 7 मार्च को सूर्यास्त पूर्व ही पूर्णिमा समाप्त हो जाएगी। जिससे प्रदोषकाल में पूर्णिमा का अभाव रहेगा। जबकि 6 मार्च को पूर्णिमा सम्पूर्ण प्रदोषकाल में व्याप्त रहेगी। इसीलिए राजस्थान में 6 मार्च को होलिका दहन और 7 मार्च को धुलेंडी मनाने का मुहूर्त है।
6 मार्च को होलिका दहन वाले स्थान
राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल आदि राज्य शामिल हैं।
7 मार्च को होलिका दहन वाले स्थान
पूर्वी उत्तरप्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तर पूर्वी छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उड़ीसा, असम सहित सभी पूर्वी प्रदेश शामिल हैं। बता दें कि जहां 6 मार्च को होलिका दहन होगा वहां 6 मार्च सोमवार की रात यानि 7 मार्च को 1:52 बजे के बाद होलिका दहन होगा। रातत्रि 2:07 बजे शुभ का चौघड़िया शुरू होगा। पूर्णिमा को भद्रा की आगे की 20 घटी छोड़कर 3 घटी (72 मिनट) यानि रात 1:52 से 3:04 तक भद्रा पुच्छ मानी जाएगी। उसी मे होलिका दहन होगा और एक घटी का मान 24 मिनट होता है। जबकि जहां 7 मार्च को होलिका दहन होगा वहां प्रदोष काल में होलिका दहन होगा।