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सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी से किसानों का रकबा शून्य, प्रदेश के 37 हजार किसानों को होगा नुकसान

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की शुरुआत आज से हो चुकी है। किसान खरीदी केंद्रों में धान बिक्री के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन इस बीच NIC के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के चलते प्रदेश के 37000 किसानों को भटकना पड़ रहा है। कबीरधाम जिले में ऐसे किसानों की संख्या लगभग 9000 है। इस गड़बड़ी के चलते किसानों के खेतों का रकबा शून्य प्रदर्शित हो रहा है।

किसान लगा रहें है सोसायटी के चक्कर

NIC के सॉफ्टवेयर में इस गड़बड़ी के चलते किसानों को धान खरीदी केंद्रों में चक्कर लगाना पड़ रहा है। तो वहीं कई किसानों का रकबा अन्य गांव में जुड़ने के कारण उन्हें धान का टोकन लेने में परेशानी हो रही है। किसानों को समिति में कंप्यूटर ऑपरेटर इसे तकनीकी गड़बड़ी बता रहे हैं। लेकिन जल्द ही इसे नहीं सुधारा गया तो किसानों को बड़ी परेशानी से जूझना पड़ेगा। अभी धान की कटाई विलम्ब होने के कारण सोसायटियों में कम किसान पहुंच रहें हैं।

एक आधार नम्बर का दो खरीदी केंद्रों में इस्तेमाल

एनआईसी अधिकारियों द्वारा इस गड़बड़ी को जल्द ठीक करने की कोशिश की जा रही है। वहीं एक किसान के दो अलग-अलग जगह भूमि होने पर आधार नंबर के अनुसार खेतों का रकबा दूसरे गांव में जुड़ गया है। इसे ठीक करने के लिए पहले गांव से रकबा कम करना पड़ेगा। तभी किसान दुसरे केन्द्र में धान बेच सकेंगे। जबकि जिले में इस साल एक लाख 17 हजार 170 किसानों ने धान बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया है। कबीरधाम जिले में 103 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। जिनमें 4 लाख 67 हजार टन धान की खरीदी का लक्ष्य रखा गया है।अधिकारी बोले जल्द ठीक होगी परेशानी कबीरधाम जिले की जॉइंट कलेक्टर दीप्ति गीते का कहना है की एकीकृत किसान मॉड्यूल मे किसानों का पंजीयन किया जा रहा था। पिछले 5 साल पंजीयन का रिकॉर्ड सॉफ्टवेयर में आगे नहीं बढ़ाया गया। इस कारण यह समस्या हो रही है। जबकि भुईया और सोसाइटी मॉड्यूल में सही दिखा रहा है। इसे जल्द सुधार लिया जाएगा।

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प्रदेश के 37 हजार किसानों का रकबा हुआ शून्य

कबीरधाम बेमेतरा दुर्ग बालोद जैसे जिलों के कई खरीदी केंद्रों में ऐसे किसानों की संख्या सैकड़ों में है। इन किसानों का रकबा सॉफ्टवेयर में शून्य दिखा रहा है। जबकि इन किसानों ने खेतों में फसल ली है और हर साल धान बेचते आ रहे हैं। इस तरह प्रदेश में कुल 37000 किसानों का रकबा शून्य हो गया है।अब किसान समिति प्रबंधकों पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। कबीरधाम जिले के मरका समिति के अंतर्गत 11 गांव आते हैं, जहां करीब 1200 पंजीकृत किसान हैं। इनमें से 28 प्रतिशत किसानों का रकबा सॉफ्टवेयर में शून्य हो गया है।