धर्म परिवर्तन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करने से इनकार कर दिया। दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले इसकी सूचना डीएम को दिए जाने को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने डीएम को सूचना देने की अनिवार्यता वाले आदेश पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
मध्य प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट के तहत धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले डीएम को इसकी सूचना देने को अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी थी। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार ने कहा कि सभी धर्म परिवर्तन गैरकानूनी नहीं हो सकते हैं। वहीं सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शादी या धर्म परिवर्तन पर कोई पाबंदी नहीं है। लेकिन डीएम को इसकी दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा अगर राज्य को अपना कोई पक्ष रखना है तो वह अगली सुनवाई में रख सकता है। मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी को होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शादी का इस्तेमाल गैर कानूनी धर्म परिवर्तन के लिए किया जाता है, हम इसको लेकर अपनी आंख फेर नहीं सकते हैं।
बता दें कि अपने अंतरिम आदेश में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि MPFRA के सेक्शन 10 के तहत लोगों को दोषी नहीं मान सकती है, अगर दो वयस्क लोगों ने आपसी सहमति से शादी की है। पिछले साल 14 नवंबर को हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हमारी राय में यह असंवैधानिक है कि धर्म परिवर्तन से पहले डीएम को इसकी जानकारी देनी होगी।