रूस के लिए भारत बना ‘Big Bazar’ , अमेरिकी धमकियों के बाद भी 3 महीने में तिगुना हुआ कारोबार
अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, नई दिल्ली। फरवरी में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद जब रूस ने भारत को डिस्काउंट पर कच्चा तेल देने का ऑफर दिया था, तो अमेरिका समेत तमाम यूरोपीय देशों में खलबली मच गई थी और पश्चिमी देशों की मीडिया ने इसपर काफी हायतौबा मचाई थी, लेकिन अगल तीन महीने में भारत ने अपना बाजार जिस तरह से रूस के लिए खोला है, वो इतिहास में दर्ज हो गया है। फरवरी में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से न केवल कच्चा तेल, बल्कि रूस से सस्ता रिफाइंड ईंधन भी भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। ऊर्जा कार्गो ट्रैकर वोर्टेक्स के मुताबिक, रूसी परिष्कृत (रिफाइंड) उत्पादों का आयात पिछले तीन साल के औसत से हाल के महीनों में तीन गुना हो गया है। यानि, प्रतिबंधों से जूझ रहे रूस की भारत ने जिस तरह से मदद की है, उसने दुनिया की दिखा दिया है, कि भारत दोस्ती के लिए कुछ भी कर सकता है और आज भारत ने साबित कर दिया है, कि 1971 में जिस तरह रूस भारत के साथ खड़ा हुआ था, साल 2022 में भारत भी रूस के साथ उसी तरह से खड़ा है।
किस देश ने कितना तेल खरीदा? वोर्टेक्स के अनुसार, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात हालांकि, जुलाई महीने में थोड़ा धीमा होकर 5% घटकर 917,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) हो गया और 1.06 मिलियन बैरल प्रति दिन (एमबीडी) के साथ चीन जुलाई में समुद्री जनित रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक बना रहा। यूरोप ने जुलाई में समुद्र में पैदा होने वाले रूसी कच्चे तेल का 1.9 mbd से कम आयात किया, जो पिछले तीन महीनों की तुलना में थोड़ा कम था, लेकिन पिछले महीने की तुलना में 13% अधिक डीजल का आयात यूरोप ने किया है।
रूस के लिए खुला भारतीय बाजार जुलाई महीने में भारत ने अपनी कुल जरूरत का 19 प्रतिशत तेल रूस से खरीदा, जबकि जून महीने में भारत ने अपनी कुल जरूरत का 20 प्रतिशत तेल रूस से खरीदा था। वोर्टेक्स के विश्लेषत सेरेना हुआंग के मुताबिक, रूस ने अपने तेल का निर्यात भारत में बढ़ाकर अमेरिका, मध्य-पूर्व का खाड़ी और पश्चिमी अफ्रीका को विस्थापित किया है। ये क्षेत्र भारत को जितना तेल निर्यात करते थे, मई से जुलाई महीने के बीच उसमें 20 प्रतिशत की कमी आई है। आपको बता दें कि, यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले तक भारत सबसे ज्यादा तेल के आयात इराक से और फिर सऊदी अरब से करता था, लेकिन अब सऊदी अरब तीसरे स्थान पर चला गया है और रूस अब भारत को तेल बेचने में दूसरे स्थान पर आ गया है, जबकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले रूस का स्थान नौंवा था।
तीन सालों में कितना था औसत आयात इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में रूसी परिष्कृत (रिफाइंड) उत्पादों का भारतीय आयात करीब 100,000 बीपीडी बढ़ गया है, जिसमें ईंधन तेल 70% है, इसके बाद जैव ईंधन और बायोफ्यूल्स रिफाइनरी फीडस्टॉक्स हैं, जिसकी पिछले तीन वर्षों में औसत आयात 30,000 बीपीडी था। हालांकि, बात अगर चीन की करें, तो चीन ने रूस तेल खरीदने पर अभी भी नियंत्रण लगा रखा है और रूसी उत्पादों का औसत चीनी आयात समय के साथ 50,000 और 60,000 बीपीडी के बीच स्थिर रहा है। भारत परिष्कृत (रिफाइंड) उत्पादों का शुद्ध निर्यातक है। अप्रैल-जून में, भारत ने आयात की तुलना में करीब 60 प्रतिशत रिफाइंड प्रोडक्श का निर्यात किया है, जो भारत के लिए गुड न्यूज है, जिसमें सबसे बड़ा निर्यात डीजल, पेट्रोल, जेट ईंधन और नेफ्था है। भारत ने सबसे ज्यादा एलपीजी, ईंधन तेल और पेट कोक का आयात किया है। वहीं, ईंधन तेल कुल उत्पादों के आयात का पांचवां हिस्सा बनाता है। वहीं, भारत की घरेलू खपत अप्रैल-जून में पिछले साल अप्रैल-जून के मुकाबले 14% बढ़ी, जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह उद्योगों का महंगे प्राकृतिक गैस से सस्ते ईंधन की तरफ शिफ्ट होने की वजह से हुआ है।
भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा वोर्टेक्सा का अनुमान है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में और अगस्त के पहले सप्ताह में, रूसी कच्चे तेल का औसत भारतीय आयात तेजी से 400,000 बैरल प्रति दिन से नीचे गिर जाएगा, लेकिन इसमें अगस्त के दूसरे हफ्ते में फिर से उछाल आएगा और ये प्रति दिन 1.1 मिलियन बैरल से ज्यादा हो जाएगा। जहाज-ट्रैकिंग एजेंसी ने कहा कि, रूसी तेल के लिए चीन और भारत के बीच प्रतिस्पर्धा, कीमतों को बढ़ा रही है। रूस से समुद्री जनित कच्चे तेल का निर्यात जुलाई में उत्पादन की कमी और उस देश में रिफाइनरी चलाने में वृद्धि के कारण गिर गया।
रिलायंस और इंडियन ऑयल खरीद रहे हैं तेल भारत की सरकारी रिफाइनरियों ने जुलाई में रूसी संस्करणों का लगभग 60% हिस्सा खरीदा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 250,000 बीपीडी का सबसे बड़ा वॉल्यूम सिक्का बंदरगाह पर आया है, जो जामनगर स्थिति रिलायंस इंडस्ट्रीज कॉम्प्लेक्स में गया है। इसके बाद मुंद्रा बंदरगाह (240,000 बीपीडी) था, जिसका एचएमईएल के बठिंडा और इंडियनऑयल की पानीपत और मथुरा रिफाइनरियों से पाइपलाइन कनेक्शन है। वहीं, वाडीनार बंदरगाह, जो मुख्य रूप से रोसनेफ्ट-समर्थित नायरा की रिफाइनरी में काम करता है, उसने लगभग 230,000 बीपीडी रूसी कच्चे तेल को संभाला है, जिसमें से 40% इंडियनऑयल की रिफाइनरियों के लिए था।