कभी गेंड़ी, कभी भौंरा.तो कभी सोंटा.अपने ठेठपन की इन तमाम वजहों से सुर्खियों रहते हुए प्रदेश की जनता के दिलों में स्थानीयता और अपनेपन की मजबूत छवि बना रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज एक बार फिर चर्चे में हैं। इस बार भी वे अपनी सहजता, सरलता और संवेदनशीलता के कारण ही सुर्खियों में हैं। मुख्यमंत्री ने आज आम जनता के साथ साथ प्रदेश के कलाकार बिरादरी को भी अहसास कराया है कि वे कलाकारों के काफी करीब हैं। संभवत: यह पहला मौका होगा कि छत्तीसगढ़ के किसी लोक कलाकार के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देने प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत इतने सारे मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष पहुंचे होंगे। श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री को फफकता देख वहां मौजूद हर एक की आंखें नम हो गईं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज गरियाबंद जिले के ग्राम बारुका पहुंचकर राज्य के सुप्रसिद्ध लोकगायक स्वर्गीय मिथलेश साहू के दशगात्र कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री बघेल ने स्वर्गीय श्री साहू के परिवारजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी शोक-संवेदना प्रकट की। इस अवसर पर उन्होंने उनकी माता मनटोरा बाई, धर्मपत्नी आशालता, पुत्र खुमन साहू एवं शोक-संतप्त परिवारजनों को ढांढस बंधाया।

श्री बघेल ने मंत्रीगणों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, अभनपुर विधायक धनेंद्र साहू, गुंडरदेही विधायक कुंवरसिंह निषाद एवं पूर्व सांसद चंदूलाल साहू मौजूद थे।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शोक-सभा में रूंधे गले से भावुक होकर स्वर्गीय श्री साहू को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के जाने-माने लोकगायक मिथलेश पारिवारिक मित्र जैसे थे, अब हमारे बीच नहीं रहे, इस पर सहसा विश्वास करना कठिन है। उन्होंने कहा कि उनसे आखिरी मुलाकात दीवाली के मौके पर हुई थी। श्री बघेल ने अत्यंत भावुक होकर कहा कि उनका निधन केवल उनके परिवार की नहीं बल्कि समाज और पूरे प्रदेश की क्षति है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉं. चरणदास महंत ने कहा कि स्वर्गीय मिथलेश साहू का निधन अत्यंत दुःखद है। एक तरह से वे हम सबके परिवार के सदस्य के समान थे। कला के साथ-साथ समाज के लोगों के हित के बारे में भी सोचते थे। उन्होंने भगवान से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि श्री साहू छत्तीसगढ़ी संस्कृति के सच्चे वाहक थे वर्तमान समय में उनकी अंत्यत आवश्यकता थी। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने भी उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को याद कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राज्य की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता।
इस अवसर पर राज्य के सुप्रसिद्ध कलाकार भारती बंधु, कुलेश्वर ताम्रकार, कविता वासनिक, प्रेम चन्द्राकर, दीपक चंद्राकर, भूपेन्द्र साहू सहित अन्य लोक कलाकारों ने उनके सुमधुर गीत गाकर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधिगण और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे।