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महासमुंद ,फर्जी डिग्री से चला रहा था अस्पताल, एसडीएम नेअस्पताल को कराया सील

महासमुंद/सरायपाली।महासमुंद जिले के सरायपाली ब्‍लाक में मनमर्जी से संचालित निजी अस्पताल व मेडिकल स्टोर्स की लगातार शिकायतों के बाद एसडीएम हेमंत रमेश नंदनवार व खंड चिकित्सा अधिकारी डा विजय कोसरिया ने ऐसे ठिकानों पर दबिश दी। यहां अवैध रूप से संचालित हास्पिटल, क्लिनिक को सील किया गया। यह कार्रवाई मंगलवार को की गई। इनके खिलाफ नर्सिंग होम एक्ट के तहत प्रकरण बनाया गया है।

कुमकुम हास्पिटल व क्लिनिक सील

एसडीएम व बीएमओ द्वारा पोस्ट आफिस के सामने अवैध रूप से संचालित 50 बिस्तर अस्पताल – कुमकुम हॉस्पिटल को सील किया गया। उक्त हॉस्पिटल का पंजीयन ना होने, मौके पर वैध दस्तावेज प्रस्तुत ना करने पर ऑपरेशन थिएटर, ओपीडी, एक्सरे कक्ष एवं मेडिकल को नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्यवाही करते हुए सील किया गया।

बता दें कि जब निरीक्षण के लिए एसडीएम और बीएमओ अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल संचालक प्रवीण शर्मा नदारद थे। जबकि, अस्पताल में आपरेशन किए गए चार मरीज भर्ती पाए गए। मरीजों ने बताया कि उनका ऑपरेशन डॉ प्रवीण शर्मा ने किया है।

अस्पताल में भर्ती मरीजों में यशवंत राय पिता रूप सिंह (26) संतपाली मिक्सर मशीन में हाथ फंस जाने से बीच की उंगली कट गई थी। जिससे ऑपरेशन करवाया गया। उंगली को काटा गया है, जो 23 जुलाई से अस्पताल में भर्ती हैं। और 24 को उनका आपरेशन किया गया।

इसी तरह आपाबाई सैलानी कला भटगांव, सावन बाई निवासी झुमका सरसीवा, सुख मोती बाघ दुलारपाली का बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ है और वे विगत दो दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं। जिन्हें पांच दिन भर्ती रखने के।लिए अस्पताल से कहा गया। उनसे अस्पताल में इसके एवज में 24 हजार की मांग की गई है। मरीजों की ओर से किसी के द्वारा 10 हजार तो किसी के द्वारा 15 हजार रुपये जमा किया गया है।

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इसी तरह भोथलडीह में अवैध रूप से क्लीनिक संचालित कर मेडिकल चला रहे हैं देवराज साहू की क्लीनिक व साहू मेडिकल को सील कर नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। मौके पर निरीक्षण में पहुंचे एसडीएम व बीएमओ ने देखा कि वहां बिना डिग्री के देवराज द्वारा भोथलडीह निवासी बालमुकुंद नायक जो खून की कमी के कारण इलाज करवाने उनके क्लीनिक पहुंचा था। जिन्हें डॉक्टर द्वारा ड्रिप चढ़ाया गया था।

धनेश्वर बंछोर दर्रा भांठा निवासी अपने पांच वर्ष के पुत्र प्रशांत बंछोर के खांसी व निमोनिया का उपचार करवाने देवराज के पास पहुंचा था। मौके पर उपचार करते पाया गया और डिग्री ना होने पर उसकी क्लीनिक को सील किया गया है।

इसी तरह मेडिकल के लाइसेंस और सर्टिफिकेट में नाम एकरूपता ना होने के कारण मेडिकल को सील किया गया है। वहीं खरखरी में स्थित अंबिका हॉस्पिटल निरीक्षण में पहुंचे तो अस्पताल संचालक नदारद मिले और अस्पताल संचालित संबंधित दस्तावेज बताने में असमर्थ रहे। जिस पर अस्पताल को 26 जुलाई को अस्पताल संचालित करने संबंधित सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने की समय सीमा दी गई है।