अनादि न्यूज़ डॉट कॉम, धर्म-दर्शन। परिवर्तिनी एकादशी का व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस व्रत पर भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा अर्चना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु सोते समय करवट बदलते हैं। परिवर्तिनी एकादशी को पार्श्व एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है।
इस दिन भक्त विधि-विधान से भगवान विष्णु के दसवें अवतार वामन देवता की पूजा अर्चना करते है। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन देवतागण को राजा बलि के अत्याचार से मुक्ति मिली थी। इस बार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि व्यक्ति इस व्रत को विधि-विधान से करें, तो उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। यदि इस बार आप भी इस व्रत को रखने की सोच रहे है, तो यहां आप इस व्रत की पूजा-विधि और पारण का समय जान सकते हैं। परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि (Parivartini Ekadashi ki puja vidhi)
. परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने के 1 दिन पहले ही ब्रह्मचर्य का पालन शुरू कर दे यानी लहसुन प्याज ना खाएं। 2. व्रत के दिन सुबह-सुबह नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा का संकल्प लें। 3. अब घर में पूजा के स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करके उसे पंचामृत से स्नान कराएं। 4. अब पंचामृत को परिवार के सदस्य सभी सदस्यों के अंगों पर भी छड़क दे। 5. बाद में उसे पी लें।
भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करके उनकी पूजा करें। 7. अब भगवान विष्णु के नामों का जाप करें और वामन देवता की कथा सुनें। 8. रात में भगवान विष्णु की मूर्ति के समीप ही सोएं। 9. अगले दिन यानी पारण के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देकर और आशीर्वाद लें। 10. सबसे अंत में पारण करें। परिवर्तिनी एकादशी के पारण का समय (Parivartini Ekadashi ka parana time) हिंदू पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा। यदि आप इस व्रत को रखते है, तो 7 सितंबर के दिन आप पारण कर सकते है। पारण का समय- सुबह 08 बजकर 09 मिनट से सुबह 08 बजकर 33 मिनट तक।