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अमेरिकी हेलीकॉप्टर को उड़ाने की कोशिश कर रहा था तालिबान, क्रैश होने से कई लड़ाकों की मौत

काबुल। पिछले साल जब अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ा था, उस वक्त वो अपने करोड़ों रुपये के हथियार भी छोड़कर चली गई थी, जिसमें सोफिस्टिकेटेड मिलिट्री मशीनरी, अत्याधुनिक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, सैकड़ों टैंक, बख्तरबंद वाहन शामिल थे। हालांकि, अमेरिकी सेना ने दावा किया था, कि उसने अपने हथियारों को न्यूट्रल कर दिया है और उसका इस्तेमाल तालिबान कभी नहीं कर सकता है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबित, तालिबान के लड़ाकों ने कुछ अमेरिकी हथियारों के साथ ट्रेनिंग करने की कोशिश शुरू कर दी है और इसी दौरान ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें कम से कम तीन तालिबानी लड़ाकों की मौत हो गई है।

ब्लैक हॉक उड़ाते समय हादसा जब अमेरिकी सेना करोड़ों डॉलर्स का हथियार छोड़कर गई थी, तो कई लोगों का मानना ​​था कि इस तरह की मशीनरी तक पहुंच हासिल करने के बाद तालिबान अजेय हो सकता है। हालांकि, आज फास्ट फॉरवर्ड और एक अमेरिकी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर संचालित करने की कोशिश में तीन तालिबानी मारे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक,राजधानी काबुल में तालिबान के प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान ये आतंकवादी गुर्गे अत्यधिक सोफिस्टिकेटेड हेलीकॉप्टर उड़ाने की कोशिश कर रहे थे और फिर वो हेलीकॉप्टर को नियंत्रित नहीं कर सके और फिर हादसा हो गया, जिसमें तीन तालिबानी लड़ाकों की मौत हो गई। तालिबान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नियंत्रण खोने की वजह से ये हादसा हुआ है, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। तालिबान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह खोराज़मी ने कहा कि, “एक अमेरिकी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, जिससे ट्रेनिंग लेने की कोशिश की जा रही थी, वो राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के परिसर के अंदर एक तकनीकी समस्या के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया।”

7 अरब डॉलर के छोड़े थे हथियार आपको बता दें कि, अमेरिका ने पिछले साल अफगानिस्तान छोड़ने के दौरान करीब 7 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य के सैन्य उपकरण छोड़ दिए थे। 2005 से शुरू होकर 16 वर्षों में कुल 18.6 अरब डॉलर के उपकरण अफगानी सुरक्षा बलों को भेंट किए गए थे। हालांकि, तालिबानी शासन के तहत काबुल के पतन के बाद अमेरिकी सेना केवल इसका आधा हिस्सा ही वापस ले सकी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने जो हथियार अफगानिस्तान में छोड़े हैं, उनमें 923.3 मिलियन डॉलर मूल्य के विमान, 9,524 एयर-टू-ग्राउंड युद्ध सामग्री, जिसकी कीमत करीब 6.54 मिलियन डॉलर है, उसे छोड़कर गई है।

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40 हजार से ज्यादा सैन्य वाहन इसके अलावा कुल 96,000 सैन्य वाहनों में से 40,000 से ज्यादा सैन्य वाहन, कुल 427,300 हथियारों में से 300,000 से ज्यादा हथियार, नाइट विजन लेंस, सर्विलांस, ​​बायोमेट्रिक और पोजिशनिंग उपकरण अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में छोड़कर चली गई। इसके बावजूद, तालिबान के लिए यह हमेशा एक चुनौती यह रही है, वह इन हथियारों का इस्तेमाल अभी तक नहीं कर पाई है। हालांकि, तालिबान के लड़ाके लगातार इन हथियारों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली है।

हथियारों का इस्तेमाल नहीं है आसान जब अमेरिकी फौज अफगानिस्तान से चली गई थी, उस वक्त अफगानिस्तान से कई ऐसी तस्वीरें सामने आईं थीं, जिनमें देखा जा रहा था कि तालिबान के लड़ाके अमेरिकी हेलीकॉप्टर्स की निगरानी कर रहे हैं और उन हेलीकॉप्टर्स की जांच की जा रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने अफगानिस्तान में इतने ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर्स छोड़ दिए हैं, जो विश्व में 85 प्रतिशत देशों के पास नहीं हैं और एक्सपर्ट्स का कहना था, कि अगर ये हेलीकॉप्टर्स सहीं हैं तो फिर तालिबान आने वाले वक्त में एक ऐसी शक्ति बन सकता था, जो अपराजेय हो सकता है। हालांकि, अमेरिका ने कहा था कि तमाम हेलीकॉप्टर्स, एयरक्राफ्ट्स, बख्तरबंद गाड़ियों को खराब कर दिया गया है और लाख कोशिशों के बाद भी अब ये तालिबान के लिए किसी काम के नहीं हैं, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं, कि क्या तालिबान ने उन हथियारों को सही करना शुरू कर दिया है? लेकिन, ज्यादातर एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिकी हथियारों को चलाने के लिए उनके लगातार मेंटिनेंस और सॉफ्टवेयर अपग्रेड की जरूरत होती है और ऐसा करना तालिबान के लिए संभव नहीं है।

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तालिबान के लिए बेकार हैं हथियार पिछले साल अमेरिकी सैन्य जनरल मैकेंजी ने कहा था कि, काबुल हवाई अड्डे पर छोड़े गए उपकरणों को असैन्य कर दिया गया है, ताकि कोई भी उनका उपयोग न कर सके। उन्होंने कहा था कि, ”यह एक जटिल प्रक्रिया है और इन मशीन प्रणालियों को खत्म करने या असैन्य करने में काफी ज्यादा वक्त लगता है। चूंकी इसका इस्तेमाल अब कोई नहीं कर पाए, लिहाजा उन्हें न्यूट्रल कर दिया गया है। उनके सॉफ्टवेयर डिलीट कर दिए गये हैं, जो सिर्फ अमेरिका के पास है।” अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने कहा था कि ”हमारे लिए हथियारों को अफगानिस्तान से वापस लाने से ज्यादा जरूरी काम इंसानों को बचाना था और हमें आखिरकार सैन्य प्रणालियों को वहीं छोड़ना पड़ा, लेकिन सैन्य सामानों को ऐसा न्यूट्रल कर दिया गया है कि उनका इस्तेमाल अब कोई नहीं कर सकता है। हालांकि, अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने यह भी कहा था, कि उन हथियारों को नष्ट नहीं किया गया है, क्योंकि भविष्य में अगर हम चाहें तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।