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किडनी क्यों फेल होती है, इसके इलाज और ट्रांसप्लांट से जुडी क्या है महत्वपूर्ण बातें

Kidney Transplant: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का किडनी ट्रांसप्लांट सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में 5 दिसंबर 2022 को सफलतापूर्वक हो गया। लालू प्रसाद यादव को किड़नी डोनेट उनकी छोटी बेटी रोहिणी ने की है। किडनी फेल/खराब क्यों होती है, आईये इसके कुछ पहलूओं पर नजर डालते हैं।

किडनी संबंधित बीमारियां होने के कारण

किडनी को हिंदी में गुर्दा कहा जाता है और हर व्यक्ति के शरीर में इनकी संख्या दो होती हैं। इसका मुख्य कार्य हमारे शरीर में यूरिया, क्रिएटिनिन और एसिड जैसे नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों को रक्त में से छानना होता है। किडनी की बीमारी के मुख्यतः दो मुख्य प्रकार हैं, एक, अल्पकालिक (तीव्र गुर्दे की चोट) और दूसरा, आजीवन (पुरानी गुर्दे की बीमारी, जो शरीर की अन्य बीमारियों से धीरे-धीरे बढ़ती है) हैं।

गौरतलब है कि यह रोग एक-दूसरे को संक्रमण से नहीं फैलता लेकिन यह आनुवंशिक हो सकता है। किडनी रोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों और स्थितियों के कारण होता है, जैसे मधुमेह (Diabetes), अतिरक्तदाब (High Blood Pressure), गुर्दा रोग (पॉलीसिस्टिक किडनी रोग या पीकेडी – यह बीमारी वंशानुगत है, जो माता पिता के जीन से संतान को मिलती है, पायलोनेफ्राइटिस या ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस – गुर्दों में होने वाला एक प्रकार का संक्रमण, जो मूत्राशय से फैलता है।) और गुर्दे की धमनी बाधित होना, इत्यादि।

क्या है इसके मुख्य लक्षण

किड़नी रोग के शुरुआती संकेतों में से एक है – टखनों, पैरों या एड़ी में सूजन। जब किडनी अपना काम सही तरीकें से नहीं करती तो शरीर में नमक जमा होने लगता है, जिससे पिंडली और टखनों में सूजन आने लगती है। इसके अलावा आंखों के आसपास सूजन, शरीर में कमजोरी/थकावट, भूख कम लगना, हीमोग्लोबिन कम होना, पेशाब की आवृत्ति में परिवर्तन (कम या ज्यादा पेशाब जाना), पेशाब में झाग या रक्त आना, त्वचा का सूखी और खुजली होना, उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) आदि लक्षण भी किडनी रोग के संकेत हो सकते हैं। हालाँकि, ध्यान रखें कि यह लक्षण सांकेतिक है और अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर्स से परामर्श जरुर करें।

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किडनी से जुड़े क्या हैं महत्वपूर्ण तथ्य

दुनिया भर में 850 मिलियन लोगों को विभिन्न कारणों से किडनी की बीमारी है, जबकि विश्व में इससे संबंधित बीमारियों से (एक्यूट किडनी इंजरी) से हर साल लगभग 1.7 मिलियन लोग मर जाते हैं। किडनी हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (ऑस्ट्रेलिया) के मुताबिक 750 व्यक्तियों में से एक बच्चा एक ही किडनी के साथ पैदा होता है।

भारत की बात करें तो,

1965 में मुंबई (बॉम्बे) के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल में पहली बार सफल किडनी का ट्रांसप्लांट किया गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में गुर्दे की वार्षिक आवश्यकता 2-3 लाख के बीच हो सकती है, जबकि वास्तव में केवल 6,000 प्रत्यारोपण होते हैं। ग्लोबल बर्डन डिजीज (जीबीडी) के 2015 के अनुसार, किडनी रोग से मृत्यु को भारत में आठवें प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (नोटो) के अनुसार, किडनी एक ऐसा अंग है जिसे जीवित व्यक्ति सबसे ज्यादा दान करते हैं। क्योंकि एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक किडनी भी काफी है, एक किड़नी के साथ भी वो बाकी लोगों की तरह ही सामान्य जीवन बिता सकता है।

दोनों किडनियां बराबर (50-50 फीसदी) काम करती हैं। लेकिन जब व्यक्ति में एक ही किडनी होती है तो वो 75 फीसदी तक काम कर सकती है। विश्व किडनी दिवस हर वर्ष मार्च माह के दूसरे बृहस्पतिवार को मनाया जाता है। इस वर्ष यह 14 मार्च 2022 को ‘हर जगह, हर किसी के लिए किडनी स्वास्थ्य’ थीम के साथ मनाया गया था। भारत में हर साल 2.5 लाख से ज्यादा किडनी की आखिरी स्टेज बीमारी से पीड़ित होते हैं। जिसमें 10 में से 7 मरीज डायलिसिस के लिए जाते है तथा इन 10 में से लगभग 6 इलाज की भारी फीस के चलते इलाज नहीं करा पाते।

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किडनी प्रत्यारोपण कैसे होता है?

सबसे पहले किड़नी से संबंधित सारी जरूरी जांचें होती हैं। अच्छे परिणाम के लिए सिर्फ ब्लड ग्रुप का ही मैच जरूरी नहीं होता, बल्कि टिशूज का मैच होना भी जरूरी है। अगर सब सही मैच हो जाते हैं तो बेहतर परिणाम मिलते हैं। किड़नी ट्रांसप्लांट सर्जरी के दौरान पेट के निचले हिस्से में एक नई किडनी लगाई जाती है और नई किडनी की धमनी और नस को शरीर की धमनी और नस से जोड़ दिया जाता है। जैसे ही रक्त प्रवाहित होना शुरू होता है, नया गुर्दा मूत्र बनाना शुरू कर देता है। लेकिन कभी-कभी इसे सामान्य रूप से शुरू होने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं।

किडनी प्रत्यारोपण व डायलिसिस में अंतर

डायलिसिस किडनी की कार्यक्षमता में मात्र 10-15 प्रतिशत सुधार लाता है, जबकि प्रत्यारोपित गुर्दा रोगग्रस्त की तुलना में 75-80 प्रतिशत बेहतर काम करता है। डायलिसिस नियमित सत्रों (कुछ समय बाद फिर) को शामिल करता है। जबकि गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद रोगी एक नया, स्वस्थ जीवन जीता है। डायलिसिस में एक सख्त आहार योजना का पालन किया जाता है, इसके विपरित गुर्दा प्रत्यारोपण की एक निश्चित अवधि के बाद स्वतंत्र रूप से पी और खा सकते हैं। डायलिसिस में जीवित रहने की दर कम होती है, जबकि गुर्दा प्रत्यारोपण बेहतर जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है।

कानूनी और नैतिक पहलू

अंग दान और प्रत्यारोपण को लेकर भारत सरकार ने मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 (THOA) बनाया है। इस नियम के तहत अंग को खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। अगर कोई नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उस पर सख्त कानूनी कार्यवाही हो सकती है। अंग प्रत्यारोपण के लिए जीवित दाताओं में मरीज के माता-पिता, भाई-बहन, बच्चे, दादा-दादी, नाती-नातिन या खून से संबंधित एक रिश्तेदार को वर्गीकृत किया गया है। अगर कोई विदेशी किडनी प्रत्यारोपण हेतु भारत आता है, तो उसे अपने देश के एक वरिष्ठ दूतावास अथवा संबंधित देश की सरकार द्वारा दाता और प्राप्तकर्ता के बीच के संबंध के अनुमोदन के बाद ही दाता को साथ लाना पड़ता है।

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किडनी प्रत्यारोपण का खर्च

किडनी प्रत्यारोपण हेतु भारत के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर व अस्पताल कोई शुल्क नहीं लेते, लेकिन दवाईयों व अन्य खर्चों को मिलाकर 3 से 4 लाख रुपये लग जाते है। यहां तक कि निजी (प्राइवेट) अस्पतालों में भी अंग निशुल्क होता है, परंतु उसे ट्रांसप्लांट करने व अन्य खर्च (जैसे डॉक्टर फीस, अस्पताल खर्च, ओपीडी फीस, दवाइयां आदि) को मिलाकर 30 से 35 लाख रुपये लग जाते हैं। अमेरिका जैसे अन्य विकसित देशों में किडनी प्रत्यारोपण लागत भारत की तुलना में बहुत ज्यादा है। अमेरिका में 80000 अमरीका डालर (अर्थात 60 लाख से 80 लाख रू.) तक किडनी प्रत्यारोपण का खर्च आ जाता है।